Thursday, September 27, 2018

सामुद्रिक ज्योतिष में ग्रहों के पर्वत

सामुद्रिक ज्योतिष महासागर की तरह गहरा है। इसमें हाथ की रेखाओं, हाथ का आकार, नाखून, हथेली का रंग एवं पर्वतों को काफी महत्व दिया गया है। हमारी हथेली पर जितने भी ग्रह हैं, उन सबके लिए अलग अलग स्थान निर्धारित किया गया है। ग्रहों के लिए निर्घारित स्थान को ही पर्वत कहा गया है। ये पर्वत हमारी हथेली पर चुम्बकीय केन्द्र हैं, जो अपने ग्रहों से उर्जा प्राप्त कर मस्तिष्क और शरीर के विभिन्न अंगों तक पहुंचाते हैं।

हम जानते हैं कि ग्रहों की कुल संख्या 9 है। इन नवग्रहों का हमारे जीवन पर प्रत्यक्ष प्रभाव होता है। ग्रह हमारे जीवन को दिशा देते हैं और इन्हीं के प्रभाव से हमारे जीवन में उतार चढ़ाव, सुख दु:ख और यश अपयश प्राप्त होता है। हमारी हथेली पर भी ग्रहों की स्थिति होती है, हम अपनी अथवा किसी अन्य की हथेली देखकर भी विभिन्न ग्रहों के प्रभाव का अनुमान लगा सकते हैं। हम सबसे पहले हथेली में बृहस्पति ग्रह के स्थान यानी गुरू पर्वत की स्थिति और उससे प्राप्त प्रभाव पर दृष्टि डालते हैं।


गुरू पर्वत : गुरू पर्वत का स्थान हथेली पर तर्जनी उंगली के ठीक नीचे होता है। जिनकी हथेली पर यह पर्वत अच्छी तरह उभरा होता है उनमें नेतृत्व एवं संगठन की अच्छी क्षमता पायी जाती है। जिनकी हथेली में ऐसी स्थिति होती है वे धार्मिक प्रवृति के होते हैं, ये लोगो की मदद करने हेतु सदैव तत्पर रहते हैं। हस्त रेखा विज्ञान के अनुसार यह पर्वत उन्नत होने से व्यक्ति न्यायप्रिय होता है और दूसरों के साथ जान बूझ कर अन्याय नहीं करता है। शारीरिक तौर पर उच्च गुरू पर्वत वाले व्यक्ति का शरीर मांसल होता है यानी वे मोट होते हैं।

यह पर्वत जिनमें बहुत अधिक विकसित होता है वैसे व्यक्ति स्वार्थी व अहंकारी होते हैं। जिनके हाथों में यह पर्वत कम विकसित होता है वे शरीर से दुबले पतले होते हैं। अविकसित गुरू के होने से व्यक्ति में संगठन एवं नेतृत्व की क्षमता का अभाव पाया जाता है। इस स्थति में व्यक्ति मान सम्मान हासिल करने हेतु बहुत अधिक उत्सुक रहता है। ऐसे व्यक्ति धन से बढ़कर मान सम्मान और यश के लिए ललायित रहते हैं।

गुरू पर्वत का स्थान जिस व्यक्ति की हथेली में सपाट होता है वे व्यक्ति असामाजिक लोगों से मित्रता रखते हैं, इनकी विचारधारा निम्न स्तर की होती है ये अपने बड़ों को सम्मान नहीं देते हैं।


शनि पर्वत : हथेली में शनि पर्वत का स्थान मध्यमा उंगली के ठीक नीचे माना जाता है। सामुद्रिक ज्योतिष कहता है कि जिस व्यक्ति के हाथ में यह पर्वत विकसित होता है वे बहुत ही भाग्यशाली होते हैं, इन्हें अपनी मेहनत का पूरा लाभ मिलता है। ये एक दिन अपनी मेहनत के बल पर श्रेष्ठ स्थिति को प्राप्त करते हैं।  जिनकी हथेली पर भाग्य रेखा बिना कटे हुए इस पर्वत को छूती है वे जीवन में अपने भाग्य से दिन प्रतिदिन कामयाबी की सीढ़ियां चढ़ते जाते हैं। उन्नत शनि पर्वत होने से व्यक्ति अपने कर्तव्य के प्रति सजग और जिम्मेदार होता है।

विकसित शनि पर्वत होने से व्यक्ति में अकेले रहने की प्रवृति होती अर्थात वह लोगों से अधिक घुला मिला नहीं रहता है। इनमें अपने लक्ष्य के प्रति विशेष लगन होती है, जिसके कारण आस पास के परिवेश से सामंजस्य नहीं कर पाते हैं। जिनकी हथेली में शनि पर्वत बहुत अधिक उन्नत होता है वे अपने आस पास से बिल्कुल कट कर रहना पसंद करते हैं और आत्म हत्या करने की भी कोशिश करते हैं।

हस्तरेखीय ज्योतिष कहता है कि जिनकी हथेली में शनि पर्वत सपाट होता है वे जीवन को अधिक मूल्यवान नहीं समझते हैं। इस प्रकार की स्थिति जिनकी हथेली में होता है वे विशेष प्रकार की सफलता और सम्मान प्राप्त करते हैं। यह भी मान्यता है कि जिनकी हथेली में यह पर्वत असामान्य रूप से उभरा होता है वे अत्यंत भाग्यवादी होते हैं और अपने भाग्य के बल पर ही जीवन में तरक्की करते हैं। अगर इस पर्वत पर कई रेखाएं है तो यह कहा जाता है कि व्यक्ति में साहस की कमी रहती है और वह काम-वासना के प्रति आकृष्ट रहता है।


सूर्य पर्वत : सूर्य पर्वत अनामिका उंगली के जड़ में स्थित होता है इसे बुद्धिमानी, दयालुता, उदारता और सफलता का स्थान माना जाता है। जिनकी हथेली में यह पर्वत उभरा होता है उनका दिमाग तेज होता है वे लोगों की सहायता और मदद करने के लिए तत्पर रहते हैं व जीवन में सफलता हासिल करते हैं। उभरा हुआ सूर्य पर्वत यश और प्रसिद्धि को भी दर्शाता है। उन्नत सूर्य पर्वत होने से आप लोगों के साथ कदम से कदम मिलाकर काम करने वाले होते हैं, आप खुशमिज़ाज और आत्मविश्वासी होते हैं। यह पर्वत अविकसित होने पर आप सौन्दर्य के प्रति लगाव रखते हैं परंतु इस क्षेत्र में आपको सफलता नहीं मिलती है।

अपोलो पर्वत अत्यंत उन्नत होने पर कहा जाता है कि आप खुशामद पसंद होते हैं और अपने आप पर जरूरत से अधिक गर्व महसूस करते है जिससे लोग आपको घमंडी समझते हैं। इस पर्वत का सपाट या धंसा होना शुभ संकेत नहीं माना जाता है इस स्थिति में आपकी सोच सीमित होती है जिससे आप मूर्खतापूर्ण कार्य कर जाते हैं। आपका जीवन स्तर भी सामान्य रहता है।

Saturday, August 18, 2018

हथेली और आपका व्यक्तित्व (Your palm and your personality)

सामुद्रिक ज्योतिष जिसे बोलचाल की भाषा में हस्त रेखा विज्ञान के नाम से जाना जाता है, अपने आप में समृद्ध ज्योतिषशास्त्र है। इसमें शरीर के अंग, त्वचा का रंग, हथेली पर फैली रेखाओं, चिन्हों एवं नाखूनों के साथ ही हथेली के आकार का भी अध्ययन होता है। सामु्द्रिक ज्योतिष के अनुसार हमारी हथेली का आकार भी हमारे विषय में काफी कुछ बयां कर जाती है।

सामुद्रिक ज्योतिष का जन्म आज से 5000 ई. पू. माना जाता है। सामुद्रिक ज्योतिष के सम्बन्ध में कहा जाता है कि शिव जी की प्रेरणा से कार्तिकेय ने इसकी रचना की, रचना के समय ही गणेश जी ने उसे उठाकर समुद्र में फेंक दिया फिर समु्द्र ने शिव जी के कहने से उसे वापस लौटा दिया इस तरह ज्योतिष की यह विधा सामुद्रिक ज्योतिष कहलायी। इस सदर्भ में यह भी कहा जाता है कि ऋषि समुद्र ने इसे पुष्पित और पल्लवित किया जिसके कारण भी यह सामुद्रिक ज्योतिष के नाम से विख्यात है। वर्तमान में "किरो" ने हस्तरेखा विज्ञान का प्रचार प्रसार किया।

हस्तरेखा विज्ञान के अन्तर्गत सिर्फ हाथ की रेखाएं ही नहीं बोलती हैं बल्कि नाखून, हथेली का रंग और हाथों का आकार भी काफी कुछ कहता है, हस्त ज्योतिष के इस सिद्धान्त को विज्ञान भी प्रमाणित करता है। आप खुद भी अपनी हथेली को देखकर अपने व्यक्तित्व की विशेषता को जान सकते हैं और दूसरों के व्यक्तित्व को समझ सकते हैं। लेकिन यह तभी संभव जब आप जानें कि हाथ कितने प्रकार के होते हैं और अलग अलग हाथों की क्या अलग अलग विशेषता होती है।

बहुत छोटी हथेली (Very small Palm):

सामुद्रिक ज्योतिष कहता है जिनकी हथेली बहुत छोटी होती है वे स्वार्थी स्वभाव के होते हैं, वे हर चीज़ में पहले अपना फायदा देखते हैं लेकिन दूसरों के लिए मुश्किल से ही भला सोचते हैं। अपने छोटे से फायदे के लिए ये लड़ाई झगड़ा करने के लिए भी तैयार रहते हैं। परोपकार और सामाज सेवा के प्रति इनमें उदासीनता देखी जाती है। इनकी सोच निम्न स्तर की होती है और ये किसी पर भी भरोसा नही करते। 

छोटी हथेली ( Small Palm)

हस्तरेखा विज्ञान के अनुसार छोटी हथेली को भी अच्छा नहीं माना जाता है। जिनकी हथेली छोटी होती है उनके विषय में सामुद्रिक ज्योतिष कहता है, कि ये व्यक्ति ख्याली पुलाव पकाने वाले होते हैं, हलांकि इनमें काफी गुण और क्षमता होती है परंतु ये अपनी क्षमता का सही उपयोग नहीं कर पाते हैं। इस तरह की हथेली वाले व्यक्ति स्वभाव से आलसी होते हैं अपने आलसपन के कारण अपने सपनो को साकार करने की दिशा में कदम नहीं बढ़ा पाते हैं। इन्हें डींगे मारने में भी काफी मज़ा आता है यानी माया के जहान में खुद भी सैर करते हैं और दूसरों को भी सैर कराते हैं। अपने इस अव्यवहारिक स्वभाव के कारण जीवन के अंतिम दिनों में अफसोस के सिवा इनके पास कुछ भी नहीं रहता है।

बड़ी हथेली (Long Palm):

जिनकी हथेली बड़ी होती है उनके विषय मे यह माना जाता है कि ये अपने काम में व्यवहारिक होते हैं और अपना काम ये लगन पूर्वक करते हैं। इन्हें चतुर भी कहा जाता है क्योंकि ये होशियारी से अपना काम निकाल लेते हैं। इस तरह की हथेली वाले व्यक्ति भी भरोसा किया जा सकता है। इनमें एक यह खूबी होती है कि ये समस्या का हल ढूंढना जानते क्योंकि समस्या का कारण क्या है यह उसे पहचाना जानते हैं। समाज में ये सक्रिय रहते हैं। सामाजिक कार्यों में इनकी प्रत्यक्ष भूमिका रहती है।

बहुत बड़ी हथेली: (Very Long Palm)
यहां "अति सर्वत्र वर्जयेत" वाली कहावत चरितार्थ होती है। लम्बा हाथ होना अच्छा है, लेकिन बहुत लम्बा हाथ होने पर व्यक्ति में साहस की कमी होती है, इनके सामने जैसे ही कठिन स्थिति आती है ये घबरा जाते हैं और चिंता में डूब जाते हैं। किसी भी प्रकार की चुनौती आने पर ये अपने आपको लाचार स्थिति में पाते हैं। इस तरह की हथेली वाले व्यक्ति में भावुकता अधिक देखी जाती है। ये कल्पना के सागर में डूबते उतरते रहते हैं।

सामान्य हथेली (Common Palm)

सामान्य हथेली वालों के लिए हस्तरेखीय ज्योतिष कहता है कि ये सामाजिक तौर पर काफी व्यवहारिक होते हैं। ये लोगों के साथ बात चीत एवं व्यवहार का तरीका बखूबी जानते हैं। जीवन में इन्हें हलांकि काफी संघर्ष करना पड़ता है परंतु ये संघर्ष से पीछे नहीं हटते और अपनी मेहनत व क्षमताओ से कठिनाईयों पर विजय प्राप्त कर परिस्थितियों को अपनी ओर मोर लेते हैं।

चौकोर हथेली (Square Palm):
हथेली का एक प्रकार यह भी है। इस प्रकार की हथेली देखने में मुलायम और कोमल नज़र आती है लेकिन इनमें काफी गांठें होती है। दोनों हाथ में अगर समानता नहीं होती है तो इस प्रकार के हाथ वाले व्यक्ति पैसों को अहमियत नहीं देते। ये ज्ञान और बुद्धि को सबसे अधिक तरजीह देते हैं। ये सामाजिक तौर पर काफी आदरणीय होते हैं और समाज की अगुआई करते हैं। आपकी हथेली भी इस तरह की है तो आप दर्शनिक, कलाकार या मनोचिकित्सक बन सकते हैं।

मुख्य हथेली (Primary palm):

मांसल, भारी और रूखे ये मुख्य रूप से पाये जाने वाले हाथ हैं। इस तरह की हथेली वालों की दोनों हथेली में समानता नहीं रहती है। इनकी दोनो हाथों की उंगली में अंतर पाया जाता है। इस तरह के हथेली जिनकी होती है वे सभ्रांत होते हैं परंतु उनमें धन के प्रति बहुत अधिक लगाव देखा जाता है। ये काफी परिश्रमी होते हैं मेहनत में काफी पीछे नहीं हटते। इनके लिए जीवन मूल्य सिर्फ भौतिक आवश्यकताओं की पूर्ति होती है। ये जीवन को खाना, पीना, मस्त रहना समझते हैं। परिस्थिति अनुकूल नहीं होने पर अपनी चाहतों को पूरा करने के लिए ये अपराध जगत से भी जुड़ सकते हैं।

परिश्रमी हथेली (Laborious Palm)

परिश्रमी हाथ देखने में काफी चौड़ा होता है। इस तरह की हथेली काफी भारी होती है व इनकी हथेली पर पर्वत काफी सख्त होते हैं। इस तरह की हथेली वाले व्यक्ति खाली बैठना पसंद नहीं करते हैं। इनकी जिन्दगी में कामयाबी इनकी मेहनत के बदौलत आती है। आपकी हथेली भी इस तरह की है तो अपने अन्दर के गुण को पहचानिये और जुट जाइये मेहनत के साथ आप निश्चय ही मंजिल को पाएंगे और कामयाबी भरी जिन्दगी का लुत्फ लेंगे।

कलाकार हथेली (Philospher Palm)

कलाकार हाथ कलाकार की तरह ही नाजुक, कोमल और उनकी कला की तरह खूबसूरत होते हैं। इनकी हथेली का रंग गुलाबी होता है और उंगली के सभी पोर्स बराबार होते हैं। इनकी उंगली लम्बी और पतली होती है। इस तरह की हथेली वाले व्यक्ति कला और सौन्दर्य के दीवाने होते हैं। ये कला जगत में तो काफी प्रसिद्धि प्राप्त करते हैं परंतु दुनियांदारी के मामले में पीछे रह जाते हैं।

Friday, June 29, 2018

भाग्य रेखा

                               भाग्य रेखा

जब कोई अवसर हमारे हाथ से निकल जाता है तो हम कहते है कि "यह हमारे भाग्य में नहीं था" इसलिए यह नहीं हुआ और हम अपने भाग्य को कोसते हैं। भाग्य को दोष देने से पहले आप यह देखिये की आपकी हथेली में भाग्य रेखा क्या कह रही है। हस्त रेखीय ज्योतिषशास्त्र में बताया गया है कि बनावट की दृष्टि से भाग्य रेखा लगभग सात प्रकार की होती है और उनका अलग अलग प्रभाव होता है। बनावट की दृष्टि से भाग्य रेखा के प्रकार क्रमश: इस प्रकार है.....


1.गहरी रेखा (Deep Fate line): हाथ में भाग्य रेखा गहरी है तो यह इस बात का संकेत है कि आपको अपने भाग्य की मदद से पैतृक सम्पत्ति और विभिन्न प्रकार के लाभ मिलेंगे। आपकी उन्नति में आपके बुजुर्गों का सहयोग रहेगा।

2.कमज़ोर रेखा (Light Fate line) : भाग्य रेखा कमज़ोर होने से इस बात का संकेत मिलता है कि आपको जीवन में असफलताओं एवं मुश्किलों का सामना करना होगा। आपकी जिन्दग़ी में निराशा के बादल छाये रहेंगे। लेकिन अगर आपके हाथ में सूर्य रेखा मजबूत है तो आप सफलता प्राप्त कर सकते हैं, इसी प्रकार अन्य रेखाओं एवं पर्वतों के प्रभाव से भी परिणाम बदल सकता है।

3.विभाजित रेखा (Divided Fate Line): भाग्य रेखा अगर दो भागों में विभाजित हो या टूटकर अंग्रेजी के Y की तरह दिखे तो यह द्वंद की स्थिति बनाता है यानी आप आप अपना लक्ष्य लक्ष्य सही प्रकार से निर्घारित नहीं कर पाते हैं और मन में उठते विचारों से लड़ते हैं। एक शब्द में कहें तो आप दो नाव की सवारी करते हैं।

4.आड़ी तिरछी रेखा (Zig Zag Fate Line): हथेली में भाग्य रेखा अगर आड़ी तिरछी हो तो समझ लीजिए आपकी जिन्दग़ी में काफी उतार-चढ़ाव व परिवर्तन आने वाला हैं। आप जीवन में संघर्ष और बाधाओं को पार करके ही अपने भाग्य का फल प्राप्त कर पाएगे। आपको आसानी से कुछ भी मिलने वाला नहीं है। इस प्रकार की रेखा यह भी बताती है कि आप निर्णय की घड़ी में उहापोह में रहते हैं अर्थात क्या करें क्या न करें वाली स्थिति आपकी हो जाती है।

5.टूटी रेखा (Broken Fate Line): भाग्य रेखा अगर टूटी हुई है तो जहां पर यह रेखा टूटी है वहां पर आपको खतरा हो सकता है अर्थात उस उम्र में आपके साथ कोई दुर्घटना घट सकती है अथवा आप गंभीर रूप से बीमार हो सकते हैं। कुल मिलाकर कहा जाय तो उम्र के इस पड़ाव में कुछ भी ऐसा हो सकता है जिससे जीवन पर संकट आ सकता है। आपका यह समय कष्टमय रहेगा।

6.जंजीरदार या लहरदार रेखा (Chained Fate Line): भाग्य रेखा जंजीरदार या लहरदार हो तो  यह इस बात का संकेत है कि आपके कार्यो में उतार चढ़ाव बना रहेगा, आप सफलता और असफलता के बीच हिचकोले खाते रहेंगे। आपका काम कभी तो असानी से बन जाएगा तो कभी छोटा मोटा काम निकलवाने के लिए भी आपको कड़ी मेहनत करनी होगी।

7.अदृश्य रेखा(Invisible Fate Line) : यह जरूरी नहीं कि जिनकी हथेली में भाग्य रेखा होती है उन्हीं का भाग्य होता है, जिनकी हथेली में भाग्य रेखा नहीं होती है उनका भी भाग्य होता है ऐसा हस्त रेखा विज्ञान कहता है। जिनकी हथेली में भाग्य रेखा नहीं होती है उनका भाग्य अन्य रेखाओं के आंकलन के आधार पर ज्ञात किया जाता है। कह सकते हैं कि, जिनकी हथेली में भाग्य रेखा नहीं दिखती हो उन्हें निराश होने की जरूरत नहीं है।

Wednesday, June 27, 2018

अंगूठे के पर्व द्वारा व्यक्तित्व

  ::::::....अंगूठे के पर्व द्वारा व्यक्तित्व......:::::::

अक्सर आपने किसी का उत्साह बढ़ाने के लिए अपनी हथेली की चारों उंगलियों को मोड़ कर अंगूठा ऊपर की ओर दिखाया होगा या किसी और को ऐसा करते देखा होगा। वास्तव में इसके पीछे एक बड़ा तथ्य यह है कि अंगूठा हमारी पूरी हथेली का प्रतिनिधित्व करता है, और यह इच्छा शक्ति एवं मन को बल प्रदान करता है। हस्तरेखा शास्त्र यानी पामिस्ट्री में तो अंगूठे के हर पोर का विशेष महत्व है।
हस्तरेखीय ज्योतिष अंगूठे को ज्ञान का पिटारा कहता है, की अंगूठे के हरेक पोर में व्यक्ति के विषय में काफी रहस्य छुपा होता है। इस पिटारे की एक मात्र चाभी है हस्त रेखा विज्ञान का सूक्ष्म ज्ञान अर्थात जिसने हस्तरेखा विज्ञान का सूक्ष्मता से अध्ययन किया है वह इस पर लगा ताला खोल सकता है। आप भी अगर हस्तरेखा विज्ञान को गहराई से समझने के इच्छुक हैं तो आपको भी अंगूठे पर दृष्टि जमानी होगी अन्यथा इस शास्त्र में आप कच्चे रह जाएंगे अर्थात "अंगूठा टेक" ही रह जाएंगे।
अंगूठे के विषय में जानकारी हासिल करने के लिए सबसे पहले तो आप अपना अंगूठा गौर से देखिये, आप देखेंगे कि अंगूठा हड्डियों के दो टुकड़ों से मिलकर बना है और अन्य उंगलियो की तरह इसके भी तीन पर्व यानी पोर हैं। इसके तीनों ही पर्व व्यक्ति के विषय में अलग अलग कहानी कहती है।


अंगूठे का पहला पर्व (First Part of the Thumb):
सामुद्रिक ज्योतिष के अनुसार जिस व्यक्ति के अंगूठे का पहला पर्व लम्बा होता है वह व्यक्ति आत्मविश्वास से भरा होता है और अपना जीवन पथ स्वयं बनता है। ये आत्मनिर्भरता में यकीन करते हैं और सजग रहते हैं। हथेली का पहला पर्व लम्बा हो यह तो अच्छा है लेकिन अगर यह बहुत अधिक लम्बा है तो यह समझ लीजिए कि व्यक्ति असामाजिक गतिविधियों को अंजाम देने वाला है, यह खतरनाक काम कर सकता है। दूसरी ओर जिस व्यक्ति के अंगूठे का पहला पर्व छोटा होता है वह दूसरों पर निर्भर रहते हैं और जिम्मेवारी भरा निर्णय नहीं ले पाते हैं। ये काम को गंभीरता से नहीं लेते हैं। पहला पर्व अगर चौड़ा है तो समझ लीजिए यह व्यक्ति मनमानी करने वाला अर्थात जिद्दी है। जिनका पहला पर्व लगभग समकोण जैसा दिखता हो उनके साथ होशियारी से पेश आने की जरूरत होती है क्योंकि ये काफी चालाक और तेज मस्तिष्क वाले होते हैं।

अंगूठे का दूसरा पर्व (Second Part of the Thumb):

अंगूठे का दूसरा भाग लम्बा होना बताता है कि व्यक्ति चालाक और सजग है। यह व्यक्ति सामाजिक कार्यों एवं जनसेवा के कार्यों में सक्रिय रहने वाला है। दूसरा पूर्व जिनका छोटा होता है वे बिना आगे पीछे सोचे काम करने वाले होते हैं परिणाम की चिंता नहीं करते यही कारण है कि ये ऐसा काम कर बैठते हैं जो जोखिम और खतरों से भरा होता है। दूसरा पर्व अंगूठे का दबा हुआ है तो यह बताता है कि व्यक्ति गंभीर और संवेदशील है और इनकी मानसिक क्षमता अच्छी है।

अंगूठे का तीसरा पर्व (Third Part of the Thumb):

अंगूठे का तीसरा पर्व वास्तव में शुक्र पर्वत का स्थान होता है जिसे व्यक्ति विश्लेषण के समय अंगूठे के तीसरे पर्व के रूप में लिया जाता है। यह पर्व अगर अच्छी तरह उभरा हुआ है और गुलाबी आभा से दमक रहा है तो यह मानना चाहिए कि व्यक्ति प्यार और रोमांस में काफी सक्रिय है। इस स्थिति में व्यक्ति जीवन के कठिन समय को भी हंसते मुस्कुराते गुजराना जानता है। यह पर्व अगर सामान्य से अधिक उभरा हुआ है तो यह जानना चाहिए कि व्यक्ति में काम की भावना प्रबल है यह इसके लिए किसी भी सीमा तक जा सकता है। अंगूठे का तीसरा पर्व अगर सामन्य रूप से उभरा नहीं है और सपाट है तो यह कहना चाहिए कि व्यक्ति प्रेम और उत्साह से रहित है।

Thursday, June 7, 2018

तिल का महत्व

समुद्र शास्त्र वैदिक ज्योतिष की एक शाखा है जिसमें तिल के महत्व, शक्तियों और उनके प्रभावों के बारे में बताया गया है। इनका असर मनुष्य के व्यक्तित्व, स्वभाव और उनके भाग्योदय पर पड़ता है। हमारे शरीर में ये विभिन्न आकार और रंग रूप के होते हैं। समुद्र विज्ञान में शरीर के अलग-अलग हिस्सों में तिल के सकारात्मक और नकारात्मक प्रभाव को बताया गया है। कहा जाता है कि शरीर पर तिल ग्रह की स्थिति और उनके प्रभावों को दर्शाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार तिल व्यक्ति के स्वभाव, कर्म और उनके जीवन में होने वाली अच्छी और बुरी घटनाओं की ओर संकेत करते हैं। इसलिए शरीर के विभिन्न अंगों पर तिल का कोई न कोई अर्थ अवश्य होता है। तिल हमारे भविष्य के कई रहस्यों को उजागर करते हैं। शरीर पर कोई तिल छोटा तो कोई बड़ा होता है ये काले और लाल रंग के होते हैं। ऐसा भी कहा जाता है कि तिल हमारे पुनर्जन्म के बारे में बताते हैं। हालांकि इनको लेकर लोगों के भिन्न-भिन्न मत हैं।

* * तिल का स्वरूप * *

* आकार के अनुसार

1- छोटा – कम प्रभावशाली
2 - बड़ा – अति शुभ
3 - लंबा – शुभ

* रूप के अनुसार

1- त्रिकोणीय – मिश्रित परिणाम
2- टेढ़ा-मेढ़ा – शुभ परिणामकारी
3- गोल – शुभ
4- वर्गाकार – अंत तक अप्रत्याशित फल परंतु मुश्किलों को दूर करने वाला

* रंग के अनुसार

1- यदि तिल लाल, हल्का भूरा, चंदन अथवा हरा पन्ना जैसे रंग का हो तो वह भाग्यशाली होता है।
2- काले रंग के तिल को अच्छा नहीं माना जाता है। इसका मतलब होता है कि जीवन में बाधाएं आएँगी।

* शरीर पर तिल और उनका मतलब *

* माथे पर तिल
1- यदि किसी व्यक्ति के माथे के बीच में तिल हो तो वह व्यक्ति शांत, बुद्धिमान, परिश्रमी और दिल का साफ होता है।
2- यदि किसी के माथे में दाहिनी ओर तिल हो तो वह व्यक्ति धनवान होता है।
3- यदि माथे में बायीं ओर तिल हो तो वह व्यक्ति स्वार्थी होता है।

* भौंह पर तिल
1- भौंह के बीच में तिल होने का मतलब होता है कि उस व्यक्ति के अंदर एक लीडर की विशेषता होगी। उसके जीवन में आर्थिक संपन्नता आएगी।
2 - यदि भौंह पर बायीं ओर तिल हो तो व्यक्ति डरपोक होगा और व्यापार और नौकरी में उसे कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा।
3- वहीं भौंह पर दाहिनी ओर तिल है तो व्यक्ति को वैवाहिक जीवन में ख़ुशियाँ एवं संतान सुख प्राप्त होगा।

* आँखों पर तिल
1- यदि किसी की दाहिनी आँख पर तिल का निशान हो तो वह व्यक्ति ईमानदार, मेहनती और विश्वास करने योग्य होता है।
2- बायीं आँख पर तिल का होना व्यक्ति के अंहकार और आशावादी सोच को दर्शाता है।

* नाक पर तिल
1- ऐसा माना जाता है कि जिस व्यक्ति की नाक पर (ठीक बीच पर) तिल होता है तो वह क्रोधी और बिना सोचे-समझे निर्णय लेने वाला होता है।
2- यदि किसी की नाक की दाहिनी तरफ तिल हो तो वह व्यक्ति कम मेहनत के बल पर अधिक धन पाने में कामयाब होता है।
3- यदि नाक की बायीं ओर तिल हो तो व्यक्ति को सफलता पाने के लिए संघर्ष करना पड़ता है।
4- यदि नाक के नीचे तिल हो तो व्यक्ति कामुक और विपरीत लिंग को आकर्षित करने वाला होगा।

* गाल पर तिल
1- जिसके बायें गाल पर तिल हो तो वह व्यक्ति अल्पभाषी, अधिक गुस्से वाला और धन ख़र्च करने वाला होता है।
2- यदि किसी के दायें गाल पर तिल हो तो व्यक्ति का स्वभाव आक्रामक होता है। इसके अलावा वह तर्कवादी और धन कमाने में अग्रणी होता है।

* कान पर तिल
1- यदि किसी के कान पर तिल हो तो उसका जीवन भौतिक सुखों से युक्त होता है।
2- यदि कान के ठीक ऊपर तिल हो तो व्यक्ति बुद्धिमान होता है।

* होंठ पर तिल
1- यदि किसी व्यक्ति के होंठ पर तिल होता है तो उन्हें अपने खान-पान पर विशेष ध्यान देना चाहिए, क्योंकि उन्हें मोटापा और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएँ हो सकती हैं।
2- यदि आपके नीचे वाले होंठ पर तिल है तो आप भोजन के शौकीन होंगे। इसके अलावा नाटक में आपकी विशेष रुचि होगी।

* जीभ पर तिल
1- यदि किसी शख्स की जीभ पर तिल है तो उसे स्वास्थ्य, शिक्षा एवं बोलचाल संबंधी परेशानियों का सामना करना पड़ेगा।
2- यदि किसी व्यक्ति की जीभ की नोक पर तिल हो तो वह व्यक्ति बहुत कूटनीतिज्ञ होता है। वह परिस्थितियों को काबू करने में सक्षम होता है। वह व्यक्ति अधिक भोजन पसंद भी होता है।

* ठोड़ी पर तिल
1- यदि किसी की ठोड़ी के बीच पर तिल होता है तो उस व्यक्ति को यात्रा करना अच्छा लगता है। उसे नई-नई जगहों पर जाना पसंद होता है।
2- यदि किसी की ठोड़ी के दाहिने हिस्से में तिल हो तो वह व्यक्ति तर्कवादी और कूटनीतिक विचारों वाला होता है।
3- वहीं जिस व्यक्ति की ठोड़ी पर बायीं ओर तिल हो तो वह व्यक्ति ईमानदार और स्पष्टवादी होता है।

* गर्दन पर तिल
1- यदि किसी व्यक्ति की गर्दन पर ठीक सामने तिल हो तो वह भाग्यशाली और कला से निपुण होता है।
2- वहीं गर्दन के पीछे वाले भाग पर तिल का होना व्यक्ति के क्रोधी को स्वभाव को दर्शाता है।

* कंधे पर तिल
1- यदि किसी व्यक्ति के बायें कंधे पर तिल का निशान हो तो वह व्यक्ति ज़िद्दी स्वभाव का होता है।
2- यदि किसी व्यक्ति के दायें कंधे पर तिल का निशान हो तो वह साहसी और बुद्धिमान होता है।

* भुजा पर तिल
1- यदि किसी व्यक्ति की दाहिनी भुजा में तिल हो तो वह बुद्धिमान और चालाक होता है।
2- बायीं भुजा में तिल का होना व्यक्ति की भौतिक सुखों की कामना को दर्शाता है लेकिन वास्तव में वह सामान्य जीवन जीता है।

* कोहनी पर तिल
- यदि किसी व्यक्ति की कोहनी पर तिल हो तो उसका मतलब होता है कि वह व्यक्ति बेचैन, कला में निपुण, धनी और भ्रमण पसंद (घूमने का शौकीन ) होगा।

* कलाई पर तिल
- यदि किसी व्यक्ति की कलाई पर तिल होता है तो वह व्यक्ति कलात्मक होता है। उसके मन में नए-नए विचार आते हैं। ऐसे लोग अच्छे पेंटर और लेखक होते हैं।

* हथेली पर तिल
-  यदि किसी की हथेली पर तिल का निशान हो तो उस व्यक्ति को कठिनाई का सामना करना पड़ता है।

* उंगली पर तिल
-  ऐसा कहा जाता है कि जिसकी उंगलियों पर तिल का निशान होता है। वह व्यक्ति विश्वासपात्र नहीं होता है। उसे चीज़ों को बढ़ा चढाकर कहने की आदत होती है।

* पसलियों पर तिल
1- दाहिनी पसली पर तिल का निशान यह बताता है कि व्यक्ति झूठ बोलने में माहिर और कई चीज़ों से भयभीत होता है।
2- वहीं बायीं पसली पर तिल व्यक्ति के सामान्य जीवन को दर्शाता है।

* पीठ पर तिल
1- पीठ पर रीढ़ की हड्डी के आसपास का तिल का होना कामयाबी , प्रसिद्धि और लीडरशिप को दर्शाता है।
2- यदि किसी व्यक्ति के शोल्डर ब्लेड्स के नीचे तिल हो तो उस व्यक्ति को जीवन में संघर्ष करना पड़ेगा।
3- यदि किसी व्यक्ति के शोल्डर ब्लेड्स के ऊपर तिल का निशान हो तो वह व्यक्ति साहस के साथ चुनौतियों का सामना करता है।

 * सीने पर तिल
1- जिस व्यक्ति के सीने पर तिल का निशान होता है उसकी कामुक प्रवृत्ति तीक्ष्ण होती है।
2- जिन महिलाओं के दाहिने सीने में तिल का निशान होता है तो उनके अंदर शराब व अन्य प्रकार का नशा करने की प्रवृत्ति पायी जाती है। वहीं यदि पुरुष के सीने में दाहिनी ओर तिल हो तो उसे आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
3- जिन पुरुषों के सीने में बायीं ओर तिल का निशान होता है तो वे चतुर स्वभाव के होते हैं लेकिन दोस्तों और रिश्तेदारों से उनके संबंध अच्छे नहीं रहते हैं। वहीं महिलाओं के बायें सीने में तिल हो तो वे शांत स्वभाव की होती हैं और परिवार, रिश्तेदारों और सहकर्मियों से उनके अच्छे संबंध होते हैं।

* नाभि पर तिल
1- जिन महिलाओं की नाभि में अथवा इसके अासपास तिल का निशान होता है तो ऐसी महिलाओं का वैवाहिक जीवन सुखी होता है।
2- किसी पुरुष के नाभि पर बायीं ओर तिल का निशान उसके समृद्ध जीवन को दर्शाता है। उसकी संतान को भी प्रसिद्धि मिलती है।

* पेट पर तिल
1- पेट पर तिल का निशान किसी भी व्यक्ति को हमेशा जोशीला बनाए रखता है।
2- अगर किसी पुरुष के उदर पर दाहिनी ओर तिल हो वह उसके मजबूत आर्थिक पृष्ठभूमि को दिखाता है। वहीं महिलाओं के लिए यह कमज़ोरी को दर्शाता है।
3- यदि पेट पर दाहिनी ओर तिल हो तो व्यक्ति की आमदनी की सुगमता को दर्शाता है।

 * नितंब पर तिल
1- जिन लोगों के दोनों नितंब पर तिल हो तो ऐसे व्यक्ति ख़ुशमिजाज़, प्रिय और विश्वास योग्य होते हैं।
2- जिनके दायीं नितंब पर तिल हो तो ऐसे व्यक्ति कलात्मक और बुद्धिमान होते हैं।
3- जिन लोगों के बायें नितंब पर तिल होता है तो ऐसे लोग सामान्य आमदनी के बावजूद अपने जीवन से संतुष्ट दिखाई देते हैं।

* गुप्तांग पर तिल
-  जिन लोगों के गुप्तांग पर तिल का निशान होता है ऐसे लोग खुले विचार वाले और ईमानदार होते हैं। इसके अलावा ऐसे लोग अधिक प्रेमी होते हैं, और उनका वैवाहिक जीवन सुखी रहता है। भौतिक सुखों के अभाव के बावजूद भी ये लोग संतुष्ट रहते हैं।

* जांघ पर तिल
1- जिन लोगों की दायीं जंघा पर दिल का निशान हो तो ऐसे लोग मध्यम स्वभावी और निडर होते हैं।
2- बायीं जांघ पर तिल का निशान किसी व्यक्ति की कलात्मक क्षमता को दर्शाता है लेकिन ऐसे व्यक्ति आलसी और अधिक सामाजिक नहीं होते हैं।

* घुटने पर तिल
1- यदि किसी व्यक्ति के बायें घुटने पर तिल का निशान हो तो ऐसे व्यक्ति साहसी और जोखिम लेने वाले होते हैं। ऐसे लोग एक राजा की तरह अपना जीवन व्यतीत करते हैं।
2- जिन लोगों के दायें घुटने पर तिल होता है ऐसे लोगों का प्रेमजीवन कामयाब होता है। ऐसे लोग सभी से मित्र जैसा व्यवहार करते हैं।

* पिण्डली पर तिल
1- दायीं पिंडली पर तिल का होना अच्छा माना जाता है। ऐसे लोग कामयाब और समृद्धिशाली होते हैं। ऐसे व्यक्ति राजनीति में अधिक सक्रिय होते हैं और महिलाओं के द्वारा इन्हें अधिक सहयोग प्राप्त होता है।
2- बायीं पिण्डली पर तिल वाले व्यक्ति मेहनती होते हैं। उन्हें काम के सिलसिले में यात्रा करनी पड़ती है और उनके मित्रों की संख्या अधिक होती है।

* टखने पर तिल
- यदि किसी के दायें टखने पर तिल होता है तो ऐसे व्यक्ति संभावित अनुमान लगाने वाले और अधिक बातूनी होते हैं। जबकि बायें टखने पर तिल के निशान वाले लोग अधिक धार्मिक प्रवृत्ति के होते हैं।

* पैर पर तिल
1- यदि किसी व्यक्ति के दायें पाँव पर तिल का निशान हो तो ऐसे लोगों को अच्छा जीवनसाथी प्राप्त होता है और उनका पारिवारिक जीवन संतोषजनक रहता है।
2- अगर बायें पैर पर तिल हो तो व्यक्ति को आर्थिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है और जीवनसाथी से भी उसके मतभेद रहते हैं।
3- यदि तलवे पर तिल हो तो स्वास्थ्य संबंधी परेशानी, दुश्मनों से चुनौती आदि का सामना करना पड़ता है।

* पैर की उंगलियों पर तिल
-  यदि किसी के पैर की उंगलियों पर तिल हो तो ऐसे व्यक्तियों का वैवाहिक जीवन सुखी नहीं होता है।

( उम्मीद है कि इस लेख के माध्यम से आप तिल के महत्व और उनकी विशेषताओं के बारे में जान गए होंगे। )

         "     ॐ तत् सत    "

Friday, May 25, 2018

आपके नाखून, आपके बारे में क्या कहते हैं?

आपके नाखून, आपके बारे में क्या कहते हैं?

 वैसे तो उंगलियां और नाखून सामुद्रिक शास्त्र के अंतर्गत ही आते हैं। लेकिन, कुछ पाश्चात्य देशों में नाखून पर विशेष शोध किए गए हैं। माना जाता है कि मानसिक स्थिति के अनुसार नाखूनों में भी परिवर्तन होते रहते हैं और यही बनते हैं हमारे भविष्य की जानकारी का आधार। माना जाता है कि आकाश मंडल से उतरने वाली विद्युत ऊर्जा इन्हीं नाखूनों के द्वारा हमारे अंदर प्रवेश करती है। हमारे देश में भी बड़ों के चरणस्पर्श को नाखून से अपने हाथों के नाखूनों द्वारा ग्रहण करने का माध्यम माना जाता है।

लंबे नाखूनः ये लोग उदार, प्रगतिशील व हंसमुख होते हैं। विचारों के धनी होते हैं।

कठोर नाखूनः ये लोग अपनी बातों पर अड़े रहते हैं। ये लोग अपनी ही बात पर अड़े रहते हैं, फिर चाहे उनकी बात सही हो या गलत।

पतले व लंबे नाखूनः ऐसे लोगों में दृढ़ मानसिक क्षमता का अभाव होता है। ये लोग विचारों से कमजोर होते हैं।

चौकोर नाखूनः जिनके नाखून लगभग चौकोर हों, वे लोग कमजोर हृदय के होते हैं। विपरीत स्थितियों में ऐसे लोग जल्दी निराश हो जाते हैं।

ज्यादा चौड़े नाखूनः जिनके नाखून लंबाई से अधिक चौड़ाई की तरफ फैले हुए होते हैं, वे अपनी लगन के पक्के होते हैं। इन्हें गुस्सा जल्दी आता है। सबसे आसानी से घुल-मिल नहीं पाते। ऐसे लोग किसी का दखल पसंद नहीं करते।

सफेद नाखूनः ऐसे लोग स्पष्ट विचारों वाले, दृढ़ निश्चयी, ऐश्वर्य प्रेमी व परिश्रम पर यकीन करने वाले होते हैं।

छोटे नाखूनः ऐसे लोग खुले विचारों के नहीं होते। स्वयं के बारे में ज्यादा सोचते हैं। इनका स्वभाव रूखा होता है।

हथेली बताएगी कि आप किस करियर को चुनेंगे

      "  हथेली बताएगी कि आप किस करियर को चुनेंगे  "
 


अपनी हथेली को समझिए। इस पर लिखा है कि आप किस करियर में जा सकते हैं। अगर आप अपनी रेखाओं को ध्यान से देखें तो जान सकते हैं कि भाग्य ने आपके लिए किस तरह का करियर चुना है...

1. प्रशासनिक सेवाएं: निष्कंलक अर्थात् शुद्घ भाग्य रेखा अनामिका की तुलना में लम्बी तर्जनी, कनिष्ठा, अनामिका के पहले पोरे को पारकर जाए। शाखायुक्त मस्तिष्क रेखा, अच्छा मजबूत दोषयुक्त सूर्य क्षेत्र तथा श्रेष्ठ अन्य रेखाएं जातक को प्रशासन संबंधी कार्यों की ओर ले जाने का संकेत करती हैं।

2. वकालत: अपने उदय के समय मस्तिष्क रेखा एवं जीवन रेखा थोड़ा गैप लेकर चले तथा मस्तिष्क रेखा के अंत में कोई फोर्क (द्विशाखा) हो, कनिष्ठा का पहला पोरा लम्बा एवं मजबूत हो तथा अच्छा बुध, तीन खड़ी लाइन युक्त हो तथा मजबूत अंगूठे का दूसरा पोरा सबल हो तो यह न्याय के क्षेत्र में ले जाने का संकेत है।

3. मशीनरी: मजबूत शनि, लम्बी गहरी मस्तिष्क रेखा, लम्बी एवं गांठदार अंगुलियां जातक का रूझान मशीनरी क्षेत्र में करती हैं।

4. कृषि: लम्बी शनि अंगुली, सबल एवं लम्बा दूसरा पोरा तथा सख्त हाथ कृषि की तरफ रूझान देता है।

5. अभिनेता: लम्बी एवं शाखा युक्त मस्तिष्क रेखा जिसकी एक शाखा बुध पर जाए, विकसित बुध तथा शुक्र तथा सूर्य एवं अच्छा चन्द्र एवं लम्बी कनिष्ठा अंगुली ऐक्टिंग के लिए उपयुक्त है।

6. गायक: अंगुलियों की तुलना में लम्बी हथेली, कोणाकार अंगुलियां, मस्तिष्क एवं जीवन रेखा में प्रारम्भ से ही गैप तथा शाखा युक्त मस्तिष्क रेखा एवं शुक्र व चन्द्र अच्छे हों।

7. अकाउटेंट: अच्छा बुध, सूर्य एवं अच्छी भाग्यरेखा तथा मजबूत अंगूठा एवं अंगुलियों की सबल विकसित दूसरी संधि गांठ हो।

8. पाकशास्त्री: लम्बी कनिष्ठा, उठा हुआ शुक्र तथा तर्जनी का विकसित एवं मोटा तीसरा पोरा होना चाहिए।

9. डांसर: लचीला अंगूठा, लचीली एवं हथेली की तुलना में लम्बी अंगुलियां।

10. इंजीनियर: लम्बा अंगूठा, तर्जनी का लम्बा दूसरा पोरा वर्गाकार हथेली, अच्छी संधि गांठें, अंगुलियों की वर्गाकार नोक, विकसित शनि एवं लम्बी मध्यमा तथा मस्तिष्क रेखा एवं अच्छा बुध इंजीनियर के लिए उपयुक्त हैं।

11. वैज्ञानिक: अच्छी एवं सफेद धब्बे युक्त मस्तिष्क रेखा तथा अच्छे बुध पर त्रिकोण का चिह्न इस क्षेत्र में लेजाने के लिए उचित है।

12. चिकित्सकः अच्छे बुध पर तीन-चार खड़ी लाइनें, लम्बी एवं गांठदार अंगुलियां तथा वर्गाकार हथेली तथा अच्छी आभास रेखा चिकित्सा क्षेत्र के लिए उपयुक्त है।

13. सैन्य सेवाएं: लम्बा एवं सख्त मजबूत अंगूठा, उन्नत शुक्र एवं मंगल अच्छी सूर्य एवं भाग्य रेखा तथा वर्गाकार या चमसाकार अंगुलियां सैन्य सेवा के लिए अच्छी हैं। इसके साथ यदि मंगल अति विकसित एवं सख्त है तो थल सेना के लिए उपयुक्त है। यदि उक्त के साथ विकसित बृहस्पति एवं मजबूत एवं थोड़ा सा अन्तराल लिए मस्तिष्क एवं जीवन रेखा का उदय हो तो हवाई सेना के लिए संकेत हैं।